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परिचय

साबरमती नदी के तट पर स्थित अहमदाबाद शहर, गुजरात राज्य का सबसे बड़ा शहर है। यह एक शानदार मध्ययुगीन राजधानी, व्यापार और वाणिज्य का केंद्र, कई मध्ययुगीन यात्रियों द्वारा भ्रमण किया गया शहर, प्रारंभिक आधुनिक औद्योगिक केंद्र तथा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। आज, यह एक ऐसा शहर है जो अपने महान शिक्षण संस्थानों और यहाँ पर फैले स्मारकों के लिए जाना जाता है।

अहमदाबाद को यूनेस्को के विश्व धरोहर शहर के रूप में मान्यता प्राप्त है।

इतिहास

खंभात (कैंबे), सूरत और भरूच के बंदरगाह शहरों से गुज़रते हुए व्यापार मार्ग पर इसकी  सामरिक स्थिति और साबरमती नदी से इसकी निकटता के कारण, कई राजाओं और राजवंशों के बीच अहमदाबाद बहुत लोकप्रिय हो गया था। 1411 में, सुल्तान अहमद शाह द्वारा इसकी स्थापना हुई थी। तब से, यह प्राचीर शहर से साबरमती नदी के पार के क्षेत्रों में पश्चिम की ओर फ़ैल गया है, जहाँ शरह के नए हिस्से स्थित हैं।

घटनाक्रम के माध्यम से इस विश्व धरोहर शहर के इतिहास का पता लगाने के लिए यहाँ क्लिक करें।
 

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शहर के किस्से

अहमदाबाद की नींव मानेक बुर्ज में रखी गई थी, जो आज प्राचीर शहर के केंद्र में स्थित है। मानचित्र पर एक नज़र डालें और आप देखेंगे कि प्रायः पुरानी संरचनाएँ साबरमती के पूर्व में स्थित हैं, जबकि इस शहर को बनाने वाले नए संस्थान पश्चिमी तट पर पाए जा सकते हैं। पश्चिमी तट पर स्थित, सरखेज स्थल एक अपवाद है, और मध्यकालीन अहमदाबाद के बाह्य क्षेत्र पर स्थित माना जाता था।

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कुंजी

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निर्मित विरासत

गलियाँ और बाज़ार

जीवित परंपराएँ

प्राकृतिक धरोहर

लोग, शख़्सियतें, संस्थान

 

×भद्रा किला

यह किला परिसर अहमदाबाद में बनने वाली पहली संरचनाओं में से एक था।

 

×जामा मस्जिद

कहा जाता है कि यह मस्जिद कभी अपने समय की सबसे बड़ी मस्जिद हुआ करती थी।

 

×बादशाह नो हाजिरो

सफ़ेद संगमरमर की यह संरचना अहमदाबाद के संस्थापक का विश्राम स्थान है।

 

×रानी नो हाजीरो

इस मकबरा परिसर की दीवारें एक ऐसे तत्व से अलंकृत हैं जो अहमदाबाद की अनूठी शिल्प परंपरा मानी जाती है।

 

×रानी रूपमती मस्जिद

यह ख़ूबसूरत मस्जिद अहमदाबाद की रानी की स्मृति में बनाई गई थी।

 

×रानी सीपरी की मस्जिद और मकबरा

इतिहासकारों और मध्ययुगीन यात्रियों ने इस ख़ूबसूरत मस्जिद और मकबरे के परिसर को समान रूप से सुंदर शीर्षक दिया है।

 

×सीदी सैय्यद की मस्जिद और मकबरा

पाँच शताब्दियों के अपने वजूद में इस मस्जिद ने कई भूमिका निभाई हैं।

 

×हाउस ऑफ़ एमजी

यह पारंपरिक अहमदाबादी हवेली जो कई अहमदाबादियों के लिए एक परिचित स्थान है, अब एक हेरिटेज (विरासती) होटल के रूप में कार्य करती है।

 

×झूलता मीनार

विशेष रूप से डिजाइन की गई इन मीनारों ने सदियों से शहर में आने वाले पर्यटकों को मंत्रमुग्ध किया है।

 

×डच और आर्मीनियाई कब्रें

ये साधारण कब्रें यूरोपीय व्यापार शक्ति के साथ शहर के संबंधों की याद दिलाती हैं।

 

×गुजरी बाज़ार

सुल्तान अहमद शाह प्रथम के शासनकाल के इस साप्ताहिक बाज़ार ने सदियों से कई पुनरुत्थान देखे हैं।

 

×आईआईएम - अहमदाबाद

यह देश के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में से एक है - इसका सुंदर परिसर एक दिलचस्प सहयोग का परिणाम है।

 

×पतंग संग्रहालय

इस पतंग संग्रहालय में ऐसे संकलन हैं जो गुजरात के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक में सबसे प्रमुखता से प्रदर्शित होते हैं।

 

×मानेक चौक

चारदीवारी वाले इस शहर के हलचल भरे केंद्र का नाम एक महान संत के नाम पर रखा गया है।

 

×साबरमती नदी

साबरमती नदी अरावली पहाड़ियों से निकलती है और अहमदाबाद से होते हुए अरब सागर की ओर जाती है।

 

×तीन दरवाजा

एक बार इस विशाल और भव्य प्रवेश द्वार पर हुए एक शाही समारोह ने मुगल सम्राट का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था।

 

×अनसूया साराभाई

अहमदाबाद में 'मोटाबेन' या बड़ी बहन के नाम से मशहूर, यह ट्रेड यूनियन नेता और सामाजिक कार्यकर्ता शहर की सबसे उल्लेखनीय शख्सियतों में से एक हैं।

 

×आत्मा हाउस

यह इमारत उस वास्तुकार द्वारा डिजाइन की गई थी जो, उत्तरी राज्यों, पंजाब और हरियाणा की राजधानी, चंडीगढ़, को डिजाइन करने के लिए प्रसिद्ध है।

 

×कैलिको वस्त्र संग्रहालय

यह संग्रहालय एक ऐसे उद्योग की कहानी बताता है जो अहमदाबाद की विरासत का केंद्र है, तथा जिसने इसे 'पूरब के मैनचेस्टर' का खिताब भी दिलवाया है।

 

×चिंतामणि पार्श्वनाथ मंदिर

18वीं शताब्दी का यह जैन मंदिर कभी 17वीं शताब्दी में राजनीतिक तनाव का स्थल था।

 

×दलपतराम

चारदीवारी वाले शहर के इस चौराहे का नाम पहले आधुनिक गुजराती नाटककार के नाम पर रखा गया, जिन्हें आज गुजराती साहित्य की दुनिया का अग्रणी माना जाता है।

 

×एलिस पुल

इस ऐतिहासिक पुल ने 19वीं शताब्दी में अहमदाबाद का नक्शा ही बदल दिया।

 

×हठीसिंह जैन मंदिर

इस जैन मंदिर का डिज़ाइन वास्तुकलात्मक सौंदर्य और वैज्ञानिक योजना का संयोजन है।

 

×कागज़ी बाज़ार

यह कागज़ी या कागज़ बाज़ार एक बहुत ही विशिष्ट सामान बेचता है।

 

×कांकरिया झील

15वीं शताब्दी की यह मानव निर्मित झील कई किंवदंतियों की स्थली है।

 

×महात्मा गांधी

सबके प्रिय 'राष्ट्रपिता', महात्मा गांधी, 1915 से 1930 तक अहमदाबाद में रहे थे।

 

×माता भवानी वाव

यह बावड़ी अहमदाबाद के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थल है।

 

×माता नी पछेड़ी

अहमदाबाद में साबरमती के तट पर एक खास समुदाय द्वारा सदियों पुरानी सांस्कृतिक परंपरा का पालन किया जाता है।

 

×मुहूरत पोल

यह प्राचीर शहर का पहला मुहल्ला है।

 

×साबरमती आश्रम

इस सादे, उपयोगितावादी, नदी के किनारे के आश्रम में ऐसे कई कार्य संपन्न हुए, जिनके परिणामस्वरूप अंततः भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन अस्तित्व में आया।

 

×श्री स्वामिनारायण मंदिर

यह हिंदू धर्म के स्वामीनारायण संप्रदाय का पहला मंदिर है।

 

×अहमदाबाद शेयर बाज़ार

यह ब्रिटिश-युग का स्मारक कभी अहमदाबाद के वित्तीय परिदृश्य में सबसे सशक्त संस्थानों में से एक था।

इसने शहर के व्यापारिक व्यवहार के तरीके को बदल दिया।

 

×डॉ विक्रम साराभाई

अहमदाबाद उस वैज्ञानिक का जन्मस्थान था जिसे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक माना जाता है।

 

×आशावली ब्रोकेड और साड़ियाँ

पुराने शहर आशावल के परिवेश में एक भव्य वस्त्र का जन्म हुआ था और इसे राजसी परिवारों और उनके महलों, दोनों को सुशोभित करने के लिए काफी शानदार माना जाता था।

 

×डबगरवाड़

इस क्षेत्र का नाम एक ऐसे समुदाय के नाम पर रखा गया है जो, एक अति विशिष्ट सेवा प्रदान करने के लिए, 15वीं शताब्दी में अहमदाबाद आया था।

 

×शाह-ए-आलम रोज़ा

प्राचीर शहर के बाहरी इलाके में स्थित, इस परिसर में अहमदाबाद की सूफी विरासत प्रदर्शित  है।

 

×सरखेज रोज़ा

इस परिसर को कभी इसके सबसे उल्लेखनीय प्रशंसकों में से एक- स्विस-फ़्रांसीसी वास्तुकार ली कॉर्बूसियर द्वारा 'अहमदाबाद का एक्रोपोलिस' कहा जाता था।

सिटी कैप्सूल

अहमदाबाद की झलकें