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परिचय

गोमती नदी के किनारे स्थित, लखनऊ शहर, उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी है। इस शहर में जगह-जगह भव्य संरचनाएँ दिखाई देती हैं। ये सभी, सदियों तक फैली समृद्धि तथा भारतीय इतिहास को आकार देने वाली घटनाओं की साक्षी रहीं हैं। नवाबों ने लखनऊ पर अपनी ऐसी अमिट छाप छोड़ी है कि उनकी जीवन शैली, व्यंजन, कला और शिल्प परंपराएँ आज तक शहर के मूलतत्त्व बने हुए हैं। इस क्षेत्र में बसने वाला प्रत्येक समुदाय इसकी संस्कृति में सम्मिलित हो गया, और इस प्रकार लखनऊ में गंगा-जमुनी तहज़ीब की स्थापना हुई।

इतिहास

लखनऊ का इतिहास महाकाव्यों की अवधि से शुरू होकर सदियों से चला आ रहा है। मध्यकालीन युग में, यह दिल्ली सल्तनत के शासन में आया और शेखजादों के नियंत्रण में रहा। शेखजादों से, इस क्षेत्र का नियंत्रण नवाबों के हाथ में आ गया। नवाब आसफ़-उद्-दौला के तहत, लखनऊ, मुग़ल साम्राज्य के अवध प्रांत की राजधानी बन गया। 1856 में, अंग्रेज़ों ने अवध को अपने कब्जे में ले लिया और इसके बाद यह संयुक्त प्रांत आगरा व अवध का हिस्सा बन गया।

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शहर के किस्से

लखनऊ शहर की कहानी मच्छी भवन से शुरू होती है, जो किसी समय पर लक्ष्मण टीला नामक टीले पर स्थित था। इस टीले से संबंधित कई किंवदंतियाँ हैं। बहुत से लोग मानते हैं कि टीले के शीर्ष पर एक मुख था जो नागों के राजा, शेषनाग, की ओर जाता था। इस टीले का नाम भगवान राम के भाई लक्ष्मण के नाम पर रखा गया था, जिन्हें शेषनाग का अवतार माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि लक्ष्मण को लखनऊ शहर का संस्थापक भी माना जाता है।
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कुंजी

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निर्मित विरासत

गलियाँ और बाज़ार

जीवित परंपराएँ

प्राकृतिक धरोहर

लोग, शख़्सियतें, संस्थान

 

×तालकटोरा कर्बला

यह धार्मिक केंद्र इस्लामी प्रथा का अभिन्न हिस्सा है।

 

×जामा मस्जिद

यह भव्य मस्जिद अवधी वास्तुकला का विशेष उदाहरण है।

 

×छोटा इमामबाड़ा

इस इमामबाड़ा परिसर में ताजमहल जैसी ही एक शानदार इमारत है।

 

×सतखंडा

इस सात मंजिली मीनार के निर्माण को अधूरा क्यों छोड़ दिया गया, इसके पीछे एक कहानी है।

 

×लखनऊ घराना कथक

बिंदादीन की ड्योढ़ी नाम से जाना जाने वाला यह भवन, वही जगह है जहाँ कथक की एक विशेष एवं अत्यंत लोकप्रिय शैली का उदय हुआ था।

 

×निशापुरी नवाब

एक उद्यमी और विभिन्नदर्शनग्राही शासकों के शाही वंश के संरक्षण के तहत, लखनऊ एक छोटे व्यापारिक केंद्र से उठकर एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र में परिवर्तित हो गया था।

 

×रूमी दरवाज़ा

अठारहवीं सदी के इस प्रवेश द्वार का संबंध रोमन साम्राज्य से है।

 

×तारे वाली कोठी

इस विशेष नाम की  कोठी ने बहुत ही विशिष्ट उद्देश्य की पूर्ति की थी।

 

×रेज़ीडेंसी परिसर

अब यह खंडहर हो चुका परिसर कभी चहल-पहल भरा यूरोपीय इलाका हुआ करता था।

 

×कैसरबाग महल परिसर

इस भव्य परिसर को 'अपने आप में एक शहर' माना जाता था।

 

×सआदत अली खान और खुर्शीद ज़ादी के मकबरे

ये मक़बरे 1857 में एक असामान्य उद्देश्य की पूर्ति हेतु अस्थायी रूप से नवीनीकृत किए गए थे।

 

×छतर मंज़िल परिसर

यह महल परिसर अपने विशाल बगीचों और कई शाही इमारतों के लिए प्रसिद्ध था।

 

×लखनऊ संगीत परंपरा

लखनऊ शहर में विविध मगर सामंजस्यपूर्ण संगीत परंपरा है।

 

×क्लॉड मार्टिन

यह फ़्रांसीसी व्यक्ति लखनऊ की सबसे जानी-मानी शख्सियतों में से एक था।

 

×बेगम हज़रत महल

लखनऊ के सबसे प्रसिद्ध शासकों में से एक, बेगम हज़रत महल अवध में अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध सबसे मुखर आवाज़ों में से एक थीं।

 

×भातखंडे संगीत संस्थान

जिस स्थान पर यह संगीत संस्थान खड़ा है, वह एक नहीं, बल्कि उन दो केंद्रों को चिह्नित करता है जो सांस्कृतिक केंद्र के रूप में शहर की पहचान थे।

 

×अमीर-उद-दौला पब्लिक लाइब्रेरी

लखनऊ के इस बहुचर्चित सार्वजनिक पुस्तकालय में पठन सामग्री का विशाल संग्रह है।

 

×बिबियापुर कोठी

लखनऊ के छावनी क्षेत्र में स्थित, यह कोठी नवाबों के पसंदीदा आवासों में से एक थी।

 

×दिलकुशा पैलेस

इस महल के नाम का अर्थ ‘दिल की खुशी’ है।

 

×अलीगंज हनुमान मंदिर

गोमती के दूसरी ओर का यह क्षेत्र अपने हनुमान मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है।

 

×कोठी हयात बख़्श/राज भवन

इस ‘जीवनदायनी’ हवेली का हमेशा से राजनीतिक सत्ता से जुड़ाव रहा है।

 

×नादान महल परिसर

इस परिसर के मकबरे लखनऊ के सबसे पुराने स्मारकों में से एक हैं।

 

×काउंसिल हाउस (विधान भवन)

गोथिक शैली में बनी और देश के विभिन्न हिस्सों से लाए गए पत्थरों से सजी, यह इमारत उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल का घर है।

 

×टीले वाली मस्जिद

इस मस्जिद को प्रायः केवल इसके स्थानीय नाम – ‘टीले वाली’ मस्जिद - द्वारा ही संदर्भित किया जाता है।

 

×बड़ा इमामबाड़ा

लखनऊ को परिभाषित करने वाली इस ऐतिहासिक संरचना की उत्पत्ति के पीछे एक असामान्य कहानी है।

 

×चिकनकारी

हाथ की कढ़ाई का यह बारीक काम लखनऊ का पर्याय है। 

 

×अवधी पाक-शैली

लखनऊ की शाही रसोई परिष्कृत, स्वादिष्ट और विशिष्ट व्यंजनों का जन्मस्थान थी।

 

×हिंदी साहित्य

लखनऊ ने हिंदी साहित्य के क्षेत्र में भी अपना योगदान दिया है।

 

×लखनऊ के चिकनी मिट्टी के खिलौने

इस सुंदर शिल्प परंपरा को कभी शाही संरक्षण प्राप्त था।

 

×लखनऊ की काव्य परंपरा

उन्नीसवीं सदी में लखनऊ में एक नई काव्य परंपरा विकसित हुई।

 

×लखनऊ का मुहर्रम

लखनऊ में मुहर्रम बहुत ही गंभीरतापूर्वक मनाया जाता है।

 

×जरदोज़ी

 लखनऊ ने धातु की कढ़ाई के इस शिल्प में अपना अनूठा हस्ताक्षर जोड़ा है।

 

×जमघट - पतंग उत्सव

इस पतंगबाज़ी के त्योहार में कई तरह की पतंगें उड़ाई जाती हैं।

 

×बेगम अख़्तर

मलिका-ए-ग़ज़ल' ने लखनऊ में अपनी संगीत यात्रा शुरू की थी।

 

×रिफ़ाह-ए-आम क्लब

यह क्लब कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का स्थल रहा है।

 

×किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज

इस राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध विश्वविद्यालय का नाम अंग्रेज़ सम्राट के सम्मान में रखा गया है।

 

×लखनऊ विश्वविद्यालय

इस प्रसिद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना में कई लोगों ने योगदान दिया था।

 

×कैनिंग कॉलेज

लखनऊ का यह सबसे पहला कॉलेज, एक गैर-शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्ति के लिए प्रतिष्ठित था।

 

×सिकंदर बाग

लखनऊ में भारत के सबसे बड़े वनस्पति उद्यानों में से एक है, जो एक शोध केंद्र से जुड़ा हुआ है।

 

×मुंशी नवल किशोर

मुंशी नवल किशोर एक बहुत ही विशिष्ट, और बहुत ही महत्वपूर्ण पेशेवर क्षेत्र में अग्रणी थे।

 

×राज्य संग्रहालय, लखनऊ

इस संग्रहालय की शुरुआत एक व्यक्तिगत संग्रहालय के रूप में हुई थी। आज, इसमें विविध प्रकार की कलाकृतियाँ मौजूद हैं।

 

×ला मार्टिनियर कॉलेज

यह उन्नीसवीं शताब्दी में बना स्कूल किसी समय पर एक ऐसे  फ़्रांसीसी का निवास स्थान हुआ करता था जिसने लखनऊ को ही अपना घर बना लिया था।

 

×हुसैनाबाद घंटाघर और पिक्चर गैलरी

उन्नीसवीं सदी का यह घंटाघर एक प्रसिद्ध अंग्रेज़ी घंटाघर जैसा बनाया गया है।

 

×अस्थि कला

सदियों पुराने इस शिल्प ने वर्तमान समय के साथ तालमेल बिठाने के लिए कई बदलाव किए हैं।

 

×चौक

यह 'चौक' या चार सड़कों का चौराहा लखनऊ के सबसे पुराने हिस्सों में से एक है।

 

×गोमती नदी

लखनऊ गंगा नदी की एक सहायक नदी के तट पर स्थित है।

 

×ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज

एक शाही हवेली में अब यह प्रमुख शैक्षणिक संस्थान स्थापित है।

 

×अमीनाबाद

लखनऊ के इस जीवंत बाजार में खरीदने के लिए बहुत कुछ है।

 

×हज़रतगंज

लखनऊ का यह प्रतिष्ठित बाज़ार लंदन के एक प्रसिद्ध वाणिज्यिक केंद्र के नमूने पर बना है।

 

×नक्खास

इमामबाड़े के आसपास का यह बाजार लखनऊ का सबसे पुराना बाजार माना जाता है।

लखनऊ की झलकें