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परिचय

तंजावूर, तमिलनाडु राज्य का एक शहर है जो अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह शाही शहर सदियों से विकसित हुआ है, जहाँ मुट्टरियारों से लेकर चोलों, नायकों और मराठों तक, प्रत्येक राजवंश ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

तंजावूर में, सबसे बड़े चोल मंदिरों में से एक है, बृहदेश्वर मंदिर, स्थित है। एक हजार साल से अधिक पुरानी, इस मंदिर की शानदार वास्तुकला हमारे समय के अभियंताओं को आज भी विस्मित करती है! संगीत, कला और नृत्य भी शहर के भीतर फले फूले, जिसके कारण यह शहर सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है।

इतिहास

तंजावूर या तंजौर (शहर का आंग्लीकृत नाम) में वास का एक लंबा इतिहास है। इसका इतिहास संगम काल के समय से चला आ रहा है जब चोलों की यहाँ राजधानी हुआ करती थी। फिर यह विजयनगर के नायकों और फिर मराठा शासकों के हाथों में आ गया, और दोनों ने शहर पर अपनी अलग छाप छोड़ी। इस प्रकार से यह शहर पूरे एतिहासिक काल में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बना रहा।

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शहर के किस्से

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, तंजावूर का नाम, तंजन नाम के एक राक्षस पर रखा गया है जिसकी आखिरी इच्छा थी कि उसकी मृत्यु के स्थान को उसका नाम दिया जाए। नक्शे पर एक नज़र डालें और आप विशाल एनीकट नहर देखेंगे जो कावेरी के पानी से तंजावूर शहर के आसपास की भूमि को सींचती है। आज भी तंजावूर जिला अपने धान के खेतों के लिए जाना जाता है।

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कुंजी

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निर्मित विरासत

गलियाँ और बाज़ार

जीवित परंपराएँ

प्राकृतिक धरोहर

लोग, शख़्सियतें, संस्थान

 

×त्यागराज

यह सड़क, संगीत जगत के, एक विलक्षण प्रतिभा संपन्न व्यक्ति के गाँव की ओर जाती है जो हमारे लिए अपरिचित नहीं हैं। उनके नाम और प्रतिष्ठा की ख्याति इतनी व्यापक है कि बुध ग्रह पर एक ज्वालामुखी विवर का नाम उनके नाम पर रखा गया है!

 

×राजा वीधी

तंजावूर की सड़कों के कुछ दिलचस्प नाम हैं।

 

×सेंट पीटर्स हायर सेकेंडरी स्कूल

मराठा महल के पास स्थित यह स्कूल दक्षिण भारत में पहला संस्थान था, जहाँ विद्यार्थियों को एक ऐसा विषय पढ़ाया जाता था जिसे आज हम एक सामान्य विषय मानते हैं।

 

×तंजौर मराठा भोजन

तंजावूर एक बहुत ही लोकप्रिय व्यंजन का जन्मस्थान है जो आज दक्षिण भारतीय व्यंजनों का अभिन्न अंग है।

 

×सर्फ़ोजी द्वितीय

तंजावूर में एक मराठा सम्राट रहता था, जिसे चीज़ो का संग्रह  करने का जुनून था।

उनके संग्रह में कई दुर्लभ पुस्तकें, पशु और पक्षी, और यहाँ तक कि हाथीदाँत में उकेरा  गया मानव कंकाल का आदमकद नमूना भी सम्मिलित था।

 

×राजराज चोल कला वीथी

इस कला दीर्घा में तंजावूर और उसके आसपास हुई खुदाई में मिलीं मूर्तियों का  संग्रह है।

इस शहर में बाकी अन्य चीज़ों  की तरह, इसके भी अस्तित्व के पीछे एक दिलचस्प  कहानी है।

 

×तंजावूर तोप

तंजावूर शहर की पूर्वी द्वार की एक दुर्जेय संतरी द्वारा सुरक्षा की जाती है जिसका डेनमार्क देश के साथ संबंध है।

 

×दरबार हॉल

यह वह हॉल है जहाँ तंजावूर के शासक दरबार आयोजित करते थे। उनमें से बहुत लोग इस हॉल की  दीवारों पर अभी भी मौजूद हैं।

 

×मराठा महल

तंजावूर राज्य पर कई राजवंशों का शासन रहा है, और मराठा उनमें से एक थे। इसी जगह पर उन्होंने अपना महल और अपना दरबार बनवाया था।

 

×सरस्वती महल पुस्तकालय

इस सार्वजनिक पुस्तकालय में विश्व भर की सैकड़ों साल पुरानी पुस्तकों और पांडुलिपियों का  सबसे दिलचस्प संग्रह है।

 

×सर्फ़ोजी मेमोरियल हॉल संग्रहालय

संग्रहालय में रूपांतरित यह आवासीय महल, तंजावूर के सबसे प्रसिद्ध लोगों में से एक का व्यक्तिगत संग्रह है।

 

×तंजावूर वीणा

तंजावूर भारत के एक ऐसे शास्त्रीय तार वाद्य यंत्र का घर है, जो भारतीय संगीत के लिए इतना महत्वपूर्ण है कि यह हिंदूओं की संगीत की देवी के प्रत्येक चित्रण में शामिल रहता है।

 

×तंजावूर, मृदंगम बानी

एक ताल वाद्य यंत्र और एक ऐसे गुरु, जो ना केवल इस यंत्र के कुछ सर्वश्रेष्ठ वादकों को प्रशिक्षित करने में सहायक रहे, बल्कि उन्होंने तंजावूर के संगीत परिदृश्य के केंद्र-मंच पर अपना आधिपत्य बनाए  रखा।

 

×तंजौर तंबूरा

बहुत से लोग नहीं जानते हैं कि तंजावूर के लोगों ने चार-तार वाले संगीत वाद्य यंत्र का आविष्कार स्वयं किया था, जो स्थानीय रूप से उपलब्ध पेड़ की लकड़ी से निर्मित किया गया था।

 

×तंजौर चित्रकला

सत्रहवीं शताब्दी में तंजावूर में एक बहुत महंगी और असाधारण कला शैली विकसित हुई थी।

 

×तंजौर चौकड़ी

चार संगीत जगत के चार भाइयों ने एक बार समय में अपने संगीत के द्वारा तंजावूर के दरबार का मनोरंजन किया था। उनमें से एक ने एक ऐसे वाद्य यंत्र का उपयोग किया जो कर्नाटक संगीत के लिए असामान्य था।

 

×तंजावूर कला तश्तरियाँ

चांदी, पीतल, तांबा, एक सुरुचिपूर्ण गोल पात्र, एक शाही उपहार बनाता है।

 

×तंजावूर के वीणा निर्माता

एक समय में बृहदेश्वर मंदिर के आस पास शिल्पकार रहते थे, जिन्होंने एक प्रतिष्ठित तंजावूर शिल्प बनाने में महत्वरूर्ण भुमका निभाई थी।

 

×श्वार्ट्ज गिरिजाघर

18वीं शताब्दी का यह गिरिजाघर एक मराठा शासक के शासनकाल के दौरान बनाया गया था, और इसमें एक संगमरमर की पट्टी सम्मिलित है, जो इंग्लैंड के प्रसिद्ध मूर्तिकारों में से एक द्वारा विशेष रूप से इसके लिए बनाई गई थी।

 

×शिवगंगा जलाशय

इस स्थल पर किसी समय बड़ी शान से खड़े इस विशाल किले के परिसर में यही एकमात्र जलाशय शेष है।

 

×कर्नाटक संगीत

तंजावूर के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य ने एक जीवंत संगीत परंपरा का पोषण किया है जो आज विख्यात है।

 

×राजराज प्रथम

बृहदेश्वर मंदिर एक ऐसे राजा की देखरेख में बनाया गया था जिनके सफल सैन्य अभियानों के  कारण ही इस भव्य मंदिर की परिकल्पना करना संभव हो सका।

 

×बृहदेश्वर मंदिर परिसर

11वीं शताब्दी का यह सुंदर, एवं भव्य मंदिर यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है और तमिलनाडु के सबसे अधिक दर्शनीय स्थलों में से एक है।

 

×चंदेश मंदिर

यह मंदिर एक संत को समर्पित है जिसे शिवजी का रूप, और इस पवित्र मंदिर परिसर का  द्वारपाल माना जाता है।

 

×भरतनाट्यम

कहा जाता है कि तंजावूर के चोल शासकों ने एक शास्त्रीय नृत्य शैली के विकास का संरक्षण किया था जो आज पूरी दुनिया में विख्यात है।

 

×चोल कांस्य प्रतिमाएँ

चोलों ने मूर्तिकला की एक सुंदर, सुरुचिपूर्ण शैली का संरक्षण किया था, जो आज उनके नाम का वहन करती है, और दुनिया भर के संग्रहालयों को इन मूर्तियों के  संग्रह की तलाश रहती है।

 

×तंजौर की गुड़ियाँ

तंजावूर से जुड़ा, मिट्टी का एक रंग-बिरंगा शिल्प है।

 

×कावेरी नदी का भू-भाग

वह नदी जिसकी उपजाऊ मिट्टी पर तंजावूर शहर  बसा है, उस नदी को दक्षिण भारत के कुछ विचारक, गंगा से भी अधिक पवित्र मानते हैं।

 

×नंदी मंडप

नंदी की एक भव्य प्रतिमा इस विशाल स्तंभ वाले हॉल के नीचे स्थित है, जोकि इस मंदिर परिसर में बाद में जोड़ी गई है।

सिटी कैप्सूल

तंजावूर की झलकें