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परिचय

वाराणसी उत्तर प्रदेश राज्य का एक शहर है। गंगा नदी के तट पर स्थित, यह एक ऐसा पवित्र शहर है जो हिंदू, बौद्ध और जैन विचारधाराओं का केंद्र है। वाराणसी ज्ञान की नगरी है, और साहित्य एवं कला का केंद्र है- इसे दुनिया के निरंतर बसे हुए सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है। अपने संपूर्ण अस्तित्व के दौरान, वाराणसी, अपनी अनूठी पहचान बनाए रखते हुए, फलता-फूलता रहा है।

इतिहास

वाराणसी को अक्सर दुनिया के निरंतर बसे हुए सबसे पुराने शहरों में से एक के रूप में वर्णित किया जाता है। इसकी अनूठी भौगोलिक स्थिति के कारण यह व्यापार और अध्ययन दोनों का एक संपन्न केंद्र है। कितने ही शासक आए और गए, परंतु वाराणसी काल के प्रकोप को सहकर भी आज अस्तित्व में है।

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शहर के किस्से

वाराणसी भगवान शिव की नगरी है, और वह स्थान है जहाँ उन्होंने और देवी पार्वती ने ब्रह्मांड की स्थापना की थी। ऐसी मान्यता है कि भगवान राम ने राक्षस-राजा रावण को परास्त करने के पश्चात यहीं पर प्रायश्चित किया था। यह स्थान महाभारत का वह युद्धक्षेत्र भी माना जाता है, जहाँ भगवान कृष्ण ने एक बहरूपीए कृष्ण को आग लगा दी थी।

मानचित्र पर करीब से एक नज़र डालें तो आप पाएँगे कि वाराणसी एक अर्धचंद्र के आकार का है। यह उसके निर्माता, भगवान शिव और उनके बालों को सुशोभित करने वाले अर्धचंद्र को एक श्रद्धांजलि है।

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कुंजी

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निर्मित विरासत

गलियाँ और बाज़ार

जीवित परंपराएँ

प्राकृतिक धरोहर

लोग, शख़्सियतें, संस्थान

 

×पंचकोसी मार्ग

सदियों से वाराणसी ने तीर्थयात्रियों - हिंदू और बौद्ध दोनों - को आकर्षित किया है।

 

×सारनाथ

वाराणसी के ठीक बाहर एक ऐसा स्थान है जिसने हमें एक नया धार्मिक दर्शन और वर्तमान भारत गणराज्य को परिभाषित करता हुआ एक प्रतीक, दोनों प्रदान किए हैं।

 

×कबीर चौरा

कबीर चौरा एक साधारण चौराहा- एक ऐसा संधि-स्थल- है जहाँ चार सड़कें मिलती हैं।

 

×संगीत का बनारस घराना

वाराणसी के इस इलाके ने एक ऐसी संगीत परंपरा का पोषण किया है जो वाराणसी के लिए अद्वितीय है।

 

×कथक - बनारस घराना

जयपुर और लखनऊ के साथ, वाराणसी के कथक की अपनी ही विशिष्ट शैली है।

 

×वाराणसी में गंगा

वाराणसी शहर अपनी सांस्कृतिक पहचान, अपनी सदियों की समृद्धि और यहाँ तक ​​कि अपनी मिट्टी की उर्वरता का श्रेय एक ही नदी को देता है, जो आज भी लाखों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

 

×बनारसी रेशम

वाराणसी सदियों पुरानी वस्त्र परंपरा का वास-स्थान है।

इस बहुसांस्कृतिक शहर का प्रतीक, यह उद्योग, सर्वोत्कृष्ट भारतीय वस्त्र बनाता है, जिसमें मुगल राज-दरबार के माध्यम से यहाँ आए फ़ारसी रूपांकनों और इस शिल्प पद्धति को स्थापित करने के लिए गुजरात से यहाँ आकर बसने वाले बुनकरों के परिवारों द्वारा किए जाने वाला जटिल बेल बूटेदार बुनाई के काम (ब्रोकेड), को सम्मिलित किया जाता है।

 

×उस्ताद बिस्मिल्लाह खान

बेनिया बाग के इलाके में एक भारतीय संगीत उस्ताद रहा करते थे। अन्य बातों के अलावा, इस व्यक्ति ने 1947 में भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस पर शहनाई बजाई थी।

 

×पीतल का काम

गंगा भूमि, जिस पर वाराणसी बसा है, तांबे में समृद्ध है। इस कारण से इस क्षेत्र में एक विशिष्ट धातु शिल्प उद्योग स्थापित हुआ है।

 

×ठठेरी बाज़ार

हालांकि इस बाजार के नाम में एक ऐसा हिंदी शब्द है जो धातु के काम को दर्शाता है, मगर वाराणसी के लोग बिल्कुल अलग ही वजह से यहाँ आते हैं।

 

×वाराणसी के डोम

वाराणसी के घाटों की देख-रेख एक समुदाय द्वारा की जाती है, जो शिव और पार्वती से जुड़ी एक किंवदंती से अपनी उत्पत्ति के बारे में बताते हैं।

 

×आलमगीर मस्जिद

वाराणसी ने हमेशा आगंतुकों को अपनी ओर आकर्षित किया है। उनमें से कुछ ने शहर में अपने निशान भी छोड़े हैं। यह विख्यात मस्जिद उन निशानों में से एक है, जिसे एक मध्यकालीन शासक ने यहाँ बना छोड़ा था।

 

×काशी विश्वनाथ मंदिर

अठारहवीं शताब्दी का यह मंदिर वाराणसी शहर के प्रमुख देवता, बाबा विश्वनाथ को समर्पित है।

 

×रत्नेश्वर महादेव मंदिर

यह अनोखा मंदिर वाराणसी के सभी मंदिरों से भिन्न है।

 

×वाराणसी की गंगा आरती

दशाश्वमेध घाट वाराणसी के सबसे प्रसिद्ध और निश्चित रूप से सबसे जीवंत घाटों में से एक है। कहा जाता है कि इसका नाम रामायण की एक घटना के नाम पर रखा गया है, और यह घाट व्यापार और निर्यात का एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी रहा है।

 

×मान मंदिर महल

वाराणसी की प्रतिष्ठा और सबसे पवित्र नदी के तट पर इसके स्थित होने के कारण, इस स्थान ने कई शाही परिवारों को यहाँ महलों और आवासों का निर्माण करने के लिए प्रेरित किया।

 

×दुर्गा मंदिर

वाराणसी का क्षितिज यहाँ के कई मंदिरों के शिखरों से सुसज्जित है।

 

×तुलसीदास

सोलहवीं शताब्दी के इस संत-कवि ने अपने महाकाव्य के आखिरी चार अध्याय वाराणसी में पूरे किए थे।

 

×अस्सी घाट

यह वाराणसी के सुदूर दक्षिण में स्थित घाट है।

 

×नेपाली मंदिर

शास्त्रों का मानना है कि काशी - जो कि वाराणसी के रूप में जाना जाता है - पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है। इस सार्वभौमिक शहर का एक "प्रतरूप" है, एक शहर जो भागीरथी नदी के तट पर स्थित है, एक ऐसा शहर जिसकी वाराणसी में अनोखी संरचनाओं द्वारा पहचान बनी है।

 

×बनारस हिंदू विश्वविद्यालय

विश्व प्रसिद्ध, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वाराणसी में ही स्थित है।

परंतु अन्य विश्वविद्यालयों के विपरीत, बीएचयू परिसर में एक असाधारण सुविधा है।

 

×रामनगर किला

गंगा नदी के दूसरे किनारे पर एक शक्तिशाली किला है।

 

×रामनवमी का त्योहार

वाराणसी रामनवमी का त्योहार बहुत ही उत्साह और उमंग के साथ मनाता है।

 

×मणिकर्णिका घाट

मणिकर्णिका घाट वाराणसी के सबसे महत्वपूर्ण घाटों में से एक है।

वाराणसी की झलकें